सोच को बदलें

ज़िन्दगी में हमें हमेशा एक शिकायत रहती है कि मैं भी करना चाहता था, पर हो नहीं सका। ये हमें तब ध्यान आता है जब कोई उस काम को कर चुका हो, उससे पहले हम अपने अपने कामों मे व्यस्त रहते है। 
अब हम चाह कर भी उसको नहीं कर पाते हैं क्योंकि हम उसको सोचना छोड़ चुके हैं। अब हम उसी में ध्यान लगाते है जो हम कर रहे होते है।
अब प्रश्न यह उठता है कि पहले ऐसा क्यों नहीं हुआ? उस का बहुत ही छोटा सा उत्तर है कि हम उन कामों को लिख नहीं पाते, बस उसके बारे में सोचते रहते हैं। पुरे दिन में हमारे मस्तिष्क में बहुत सारे विचार आते हैं, जिनको नियंत्रण में करना आसान बात नहीं है। हमारा मस्तिष्क वैसा ही करता है जैसा हम सोचते हैं। ज़िन्दगी में कुछ भी कठिन नहीं है बस हम उसे करने को तैयार होने चाहिये। हम सभी अपनी छोटी छोटी आदतों को सुधार करके बड़े से बड़ा काम आसानी से कर सकते हैं। मेरी ज़िन्दगी में ऐसे बहुत से काम थे जिनको में करना चाहता था लेकिन कर नहीं पाया, क्योंकि मैं बस उसके बारे में सोचता रहा। लेकिन जिन कामों को मैंने लिख लिया और उसको करना शुरु कर दिया उन सभी कामों में मुझे बहुत ही अच्छे परिणाम मिले।
मेरा आप सभी से यह अनुरोध है कि इस बार आप जब भी कुछ करने की सोचें तो उसे सिर्फ सोचे ही नहीं बल्कि उसको लिख भी लें और उसको करना शुरू कर दें। आपको भी बहुत अच्छे परिणाम देखने को मिलेंगे।
इससे हमारा आत्म विश्वास भी बढ़ेगा और अगला काम करने के लिए हमे बेहतर ढंग से प्रेरित भी करेगा।

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